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कश्मीर के स्कूल में छात्रा के सवाल ने चौंकाया, बांग्लादेशी राजदूत ने साझा किया यादगार अनुभव

जम्मू-कश्मीर। भारत में बांग्लादेश के राजदूत के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा कर चुके रियाज हमीदुल्लाह ने कश्मीर से जुड़ा एक खास अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि अपने कार्यकाल के दौरान कश्मीर दौरे पर वह एक स्कूल गए थे। वहां एक छात्रा ने उनसे ऐसा सवाल पूछा, जिसे सुनकर वह कुछ पल के लिए चौंक गए। हालांकि उन्होंने छात्रा के सवाल का जवाब दिया, लेकिन उस मुलाकात और सवाल को वह आज भी एक यादगार अनुभव के तौर पर देखते हैं।
रियाज हमीदुल्लाह ने कश्मीर यात्रा के दौरान स्कूल में बिताए समय का जिक्र करते हुए बताया कि वहां विद्यार्थियों से बातचीत का अवसर मिला था। इसी दौरान एक छात्रा ने उनसे सवाल किया। सवाल उनके लिए अप्रत्याशित था और उन्होंने इसे अपने कश्मीर दौरे की खास स्मृतियों में शामिल बताया।
हमीदुल्लाह के अनुसार, छात्रा के सवाल ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने मौके पर उसका जवाब दिया, लेकिन वह बातचीत उनके जेहन में लंबे समय तक बनी रही। राजदूत ने इस अनुभव को कश्मीर में अपने कार्यकाल के दौरान मिले मानवीय और शैक्षणिक अनुभवों से जोड़कर साझा किया।
कश्मीर यात्रा के दौरान स्कूल का दौरा उनके लिए केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा। विद्यार्थियों के साथ बातचीत ने उन्हें वहां के बच्चों की सोच और जिज्ञासाओं को करीब से समझने का मौका दिया। इसी बातचीत के दौरान छात्रा की ओर से पूछे गए सवाल ने उनका ध्यान विशेष रूप से खींचा।
हमीदुल्लाह ने स्कूल में पढ़ाई जा रही उर्दू और साहित्यिक सामग्री का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वहां अल्लामा इकबाल की कुछ पंक्तियां पढ़ाई जा रही थीं। इकबाल की कविताओं और विचारों का भारतीय उपमहाद्वीप के साहित्यिक और सांस्कृतिक जीवन में व्यापक प्रभाव रहा है।
अल्लामा इकबाल का साहित्य भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित पूरे दक्षिण एशिया के साहित्यिक इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। उनकी रचनाओं में दर्शन, आत्मचिंतन, समाज और मानव जीवन से जुड़े विषय दिखाई देते हैं। कश्मीर के स्कूल में उनकी पंक्तियों का पढ़ाया जाना भी हमीदुल्लाह के लिए उल्लेखनीय अनुभव रहा।
राजदूत ने अपने अनुभव को साझा करते हुए यह भी संकेत दिया कि स्कूल में विद्यार्थियों के बीच साहित्य और कविता की मौजूदगी ने उन्हें प्रभावित किया। एक विदेशी राजनयिक के तौर पर कश्मीर की यात्रा के दौरान स्थानीय विद्यार्थियों से संवाद उनके लिए अलग तरह का अनुभव था।
कश्मीर से जुड़ा यह अनुभव उनके भारत में राजदूत के कार्यकाल की यादों का हिस्सा बन गया है। रियाज हमीदुल्लाह ने भारत में अपने कार्यकाल के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों से मुलाकात की। कश्मीर का यह स्कूल दौरा उन्हीं यात्राओं में से एक था, लेकिन छात्रा के सवाल के कारण यह उनके लिए विशेष रूप से यादगार बन गया।
उन्होंने बताया कि छात्रा के सवाल का उन्होंने जवाब दिया था। हालांकि उपलब्ध जानकारी में उस सवाल और उसके जवाब के शब्दशः विवरण का उल्लेख नहीं किया गया है। यही कारण है कि इस घटना का मुख्य पहलू राजदूत द्वारा साझा किया गया उनका व्यक्तिगत अनुभव है।
स्कूल में विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान छात्रा की जिज्ञासा ने उन्हें प्रभावित किया। सामान्य तौर पर राजनयिक यात्राओं में सरकारी अधिकारियों और संस्थानों के साथ बैठकें होती हैं, लेकिन स्थानीय बच्चों के साथ सीधा संवाद अलग तरह की समझ विकसित करने का अवसर देता है।
कश्मीर को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लंबे समय से अलग-अलग चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में वहां के स्कूल में विद्यार्थियों के साथ संवाद का अनुभव एक राजदूत के लिए स्थानीय समाज को समझने का माध्यम बन सकता है। हमीदुल्लाह ने अपने अनुभव को इसी व्यक्तिगत स्मृति के रूप में सामने रखा।
उन्होंने अल्लामा इकबाल की पंक्तियों का जिक्र करते हुए यह भी बताया कि साहित्य किस तरह विद्यार्थियों की शिक्षा का हिस्सा बना हुआ है। इकबाल की रचनाएं दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में पढ़ी जाती हैं और उनकी कविताओं के विभिन्न अंश शैक्षणिक तथा साहित्यिक संदर्भों में उद्धृत किए जाते हैं।
रियाज हमीदुल्लाह के कश्मीर अनुभव में स्कूल और वहां के विद्यार्थियों की भूमिका प्रमुख रही। एक छात्रा का सवाल उनके लिए इतना अप्रत्याशित था कि उन्होंने उसे अपने कार्यकाल की यादों में विशेष स्थान दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सवाल का जवाब तो दिया, लेकिन वह सवाल हमेशा एक स्मृति के रूप में उनके साथ रहेगा।
भारत में बांग्लादेश के राजदूत के रूप में उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद साझा किया गया यह अनुभव दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर होने वाले संपर्क की एक झलक भी देता है। राजनयिक संबंधों के साथ-साथ शिक्षा, संस्कृति और साहित्य के स्तर पर होने वाली बातचीत भी देशों के बीच आपसी समझ को प्रभावित करती है।
कश्मीर के स्कूल में अल्लामा इकबाल की पंक्तियों का जिक्र इस अनुभव का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। इकबाल का साहित्य पूरे उपमहाद्वीप में जाना जाता है। उनकी रचनाओं में युवाओं, आत्मविश्वास और समाज से जुड़े विचारों को प्रमुखता मिली है।
हमीदुल्लाह के मुताबिक स्कूल में विद्यार्थियों के साथ हुई बातचीत ने उन्हें कश्मीर को एक अलग नजरिए से देखने का अवसर दिया। वहां की शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की जिज्ञासा से जुड़ा अनुभव उनके लिए यादगार रहा।
उनके अनुसार, छात्रा ने ऐसा सवाल किया था जिसकी उन्होंने उम्मीद नहीं की थी। सवाल सुनकर वह चौंके, लेकिन उन्होंने उसे टालने के बजाय जवाब दिया। बातचीत समाप्त होने के बाद भी वह सवाल उनकी स्मृति में बना रहा।
राजदूत के इस अनुभव से यह भी सामने आता है कि आधिकारिक यात्राओं के दौरान स्थानीय लोगों और खासकर विद्यार्थियों से होने वाली मुलाकातें कितनी यादगार हो सकती हैं। कई बार छोटी-सी बातचीत भी लंबे समय तक स्मृति का हिस्सा बनी रहती है।
कश्मीर यात्रा से जुड़े इस अनुभव को साझा करते हुए हमीदुल्लाह ने स्कूल में पढ़ी जा रही अल्लामा इकबाल की पंक्तियों का भी उल्लेख किया। इससे उनके अनुभव में शिक्षा और साहित्य का पहलू भी जुड़ गया।
भारत में अपने कार्यकाल के दौरान कश्मीर का यह दौरा रियाज हमीदुल्लाह के लिए एक खास स्मृति बन गया। छात्रा के सवाल और स्कूल में इकबाल की पंक्तियों से जुड़ा अनुभव उन्होंने कार्यकाल पूरा होने के बाद साझा किया।
फिलहाल उस छात्रा ने वास्तव में क्या सवाल पूछा था और राजदूत ने उसका क्या जवाब दिया, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं है। लेकिन हमीदुल्लाह ने स्पष्ट रूप से बताया कि सवाल ने उन्हें चौंकाया और वह बातचीत उनके साथ एक याद के रूप में बनी रही।
इस अनुभव के साथ उन्होंने कश्मीर के स्कूल में पढ़ी जा रही अल्लामा इकबाल की पंक्तियों का भी उल्लेख किया। इस तरह उनके द्वारा साझा की गई स्मृति में कश्मीर, विद्यार्थियों के साथ संवाद और दक्षिण एशियाई साहित्य के महत्वपूर्ण नाम अल्लामा इकबाल—तीनों पहलू सामने आते हैं।





